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Showing posts from November, 2020

Engineering aur pyaar (2)

                    मोहब्बक्त की  बात आज  कॉलेज  से  आने  के  बाद  से  ही  तबियत  कुछ  बिगड़ी  सी  लग  रही  थी,  हाल  कुछ  ऐसा  था  जैसे  सबकुछ  कहि  छोड़कर  आ  गया  हूं।  मैं  पूरी  रात  ना  जाने  किन   उलझनों  में  उलझा  रहा,  मैं  एक  ऐसे  ख्याल  में  था  जिसमे  याद  कर ने   को  ना  कोई  पहचान  थी,  ना  उसकी  मुस्कान  नाही  उसकी  बातें  थी...  थी  तो  बस  उसकी  एक  झलक,  उस  रात  की  कहानी  कुछ  ऐसी  थी ...           अगले  कुछ  दिन  कॉलेज  में  उसके  बारे  में  जानने  में  निकल  गए।  वो  कॉलेज  हमेशा  स्कूटी  से  आती  है,  वो  लोगो  से  कम  मिलना  और  कम  बाते  करना  पसंद  करती  है,  उसके  कुल मिलाकर  4  6  ही  दोस्त  थे  तो  अब  मेरी  मुश्किलें  और  बढ़ने  वाली  थी।  यू  तो  आते  जाते  मुलाकाते  हो  ही  जाती  थी,  क्योंकि  कई  बार  ये  आंखे  टकराती  जो  थी...  पर  अभी  सबकुछ  अधूरा  सा  था, एकतरफा... अब  कॉलेज  में  जाते  हुए  कई  दिन  बीत  चुके  थे  अब  सब्जेक्ट्स  का  बोझ  सिर  पर  बढ़ता  जा  रहा  था  और  जैसे  जैसे  मैं  उस  चेहरे  को  और  ज्यादा  देख  रहा  था  वैसे  वैसे मैं

छठ पूजा!🙏

  छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है।  इसकी शुरुआत  कार्तिक शुक्ल चतुर्थी  को तथा समाप्ति  कार्तिक शुक्ल सप्तमी  को होती है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं।   इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते। छठ में कोई  मूर्तिपूजा  शामिल नहीं है। शुरुवात- छठ पूजा की परम्परा और उसके महत्त्व का प्रतिपादन करने वाली अनेक पौराणिक और लोक कथाएँ प्रचलित हैं। देव सूर्य मंदिर (बिहार) Image source: google मान्यता है की देव माता अदिति ने की थी  छठ  पूजा। एक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गये थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के  देव सूर्य मंदिर  में छठी मैया की आराधना की थी। तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था। इसके बाद अदिति के पुत्र हुए त्रिदेव रूप आदित्य भगवान, जिन्होंने असुरों पर देवताओं को विजय दिलायी। कहते हैं कि उसी समय से देव सेना षष्ठी देवी के नाम पर इस धाम का नाम देव हो गया और  छठ  का चलन भी शुरू हो गया। रामायण से                          एक मान्यता के अनुसार 

Engineering Aur Pyaar (1)

        कॉलेज  का  पहला  दिन... (Chapter-1)                        आज  मेरा  कॉलेज  का  पहला  दिन  था...  हर  कोई  जब  पहले  दिन  कॉलेज  जाता  है  तो  ना  जाने  कितना  उत्साह  अंदर  उमड़ता  रहता  है।  सबकुछ  पाने  की  सबकुछ  देखने  की  और  बहुत  कुछ  करने  की  इच्छाएं  मन  मे  जगह  बनाती  है  और  हम  थोड़ा  डरते  भी  है... और  साथ  ही  ऐसा  लगता  है  जैसे  आसमान  में  हो  क्योंकि  अब  जाकर  पहली  बार  हम  अपने  घर  से  कही  दूर  आये  होते  है...         ऐसा  ही  कुछ  हाल  था  मेरा  आज  वो  पहला  दिन  है  जब  मैं  सच  मे  कुछ  बनने  का  सोचने  की  जगह  कुछ  बनने  की  कोशिश  करने  जा  रहा  था...   और  शायद  ये  मेरी  जिंदगी  का  पहला  ऐसा  कदम  था,  जहाँ  से  अब  सारे  रास्ते  मुझे  खुद  ही  तय  करने  थे। कॉलेज  शुरू  होने  के  2दिन  पहले  ही  मैंने  कमरा  ले  लिया  था,  हम  दो  दोस्त  साथ  ही  आये  थे  लेकिन  उसने  c.s  चुना  और  मैंने  मैकेनिकल ....  वैसे  तो  कॉलेज  में  दाखिले  के  लिए  2...3  बार  आ  चुके  थे।                      लेकिन  वो  पहला  दिन,  जब  कंधे  पर  एक  बैग