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दोस्ती...



किसी  ने  सही  कहा  है  कि  जो  खर्च  हो  जाता  है  वो  वापस  कभी  नही  मिलता  फिर  चाहे  वो  पैसा  हो  या  वक़्त।  वो  वक़्त  जिसकी  रफ्तार  भी  धीमी  पड़  जाती  थी  जब  वो  साथ  होते  थे  और  वही  वक़्त  रेत  की  तरह  मुट्ठी  से  निकल  जाता  था  जब  अकेलेपन  में  वो  साथ  देने  आते  थे।

  कुछ  ऐसे  ही  किस्से  लिख  रहा  हू  उन  दोस्तो  के  नाम  जिन्होंने  जिंदगी  को  जिंदगी  बनाया   है-

बहुत  दिनों  बाद  पुराने  दोस्तों  से  मुलाकात  हुई  मिलते  ही  दिल  मे  दबी  खुशनुमा  यादों  की  बरसात  हुई।  वो  झगड़े  जो  हम  एकदूसरे  से  करते  थे,  जो  कोई  और  कर  ले  तो  उसे  सब  साथ  ही  मारने  निकलते  थे। 
वो  बाते  जो  एक  दूसरे  की  खिंचाई  से  शुरु  होती  थी।  वो  राते  जो  ताश  की  गड्डियों  की  शर्तों  में  गुजरती  थी।  कभी उदास  होने  पर  साली  गालिया  भी  पड़ती थी।  सेमेस्टर  के  दो  दिन  पहले  तो  किताबो  से  धूल  हटती  थी।                
       वैसे  तो  कुछ  खास  समय  बचता  नही  था  हमारे  पास  पर  फिर  भी  सुबह  शाम  के  ना  जाने  कितने  घण्टे  चाय  की  तफरी  पर  कटती  थी। 
                       वो  बर्थडे  की  रात  को  जागकर  उसे  लात  मार  कितना  सुकून  मिलता  था,  और  फिर  उसे  आराम  दिलाये  बिना  हमारी  पलक  भी  कहा  झपकती  थी।  बर्थडे  का  केक  तो  कभी  कटता  ही  नही  था,  वो  तो  बस  हाथ  में  कितना  आ  जाये  बस  इसी  पर  बर्थडे  मनता  था। याद  है  मुझे  वो  ठंडी  की  राते  जब  आग  के  आगे  बैठ  हम  पैसे  जोड़ा  करते  थे  थोड़े  थोड़े  ही  जोड़कर  सबके  लिए  बियर  की  व्यवस्था  करते  थे।  एक  ऐसा  भी  रहता  था  हर  बार  जो  कहे  इस  बार  मिला  दे  भाई  अगली  बार  मैं  तेरा  भी  पैसा  दे  दूंगा  और  एक  वो  जो  एक  के  लिए  तो  पैसे  जोड़ता  था  पर  चढ़ने  के  बाद  अकेले  ही  सबके  पैसे  दिया  करता  था। 
वो  बातो  ही  बातो  में  बहुत  दूर  निकल  जाना  अपने  साथ  रहने  की  कसमो  को  निगल  जाना।
                  वो  बैठकर  रात  भर  किसी  एक  कि  लव  स्टोरी  सुनना  तेरी  ही  गलती  थी  कहकर  दुबारा  बात  करने  को  बोलना।
याद  है  वो  किस्सा  जब  एक  अंडरवियर लेने  पर  भी  पार्टी  देनी  पड़ती  थी  जो  कोई  लड़की  से  बात  करता  भी  देख  ले  तो  साला  फालतू  ही  सबको  चाय  पिलानी  पड़ती  थी।
महीने  की  शुरुआत  में  आने  वाले  पैसो  पर  10  दिन  खूब  अय्याशी  उड़ती  थी,   उसके  बाद  तो  बस  रूम  पर  बनी  तहडी  ही  अच्छी  लगती  थी।
         याद  है  दोस्त  के  पीछे-पीछे  चोरी  से  उसकी  गर्लफ्रैंड  से  मिलने  भी  पहुच  जाते  थे  ये  साले  काम  न  बिगाड़  दे,  इस  टेंशन  में  दोस्त  अपनी  गर्लफ्रैंड  से  पहचान  तक  भी  नही  कराते  थे।  रेस्टुरेंट  में  पिज़्ज़ा  के  बचे  टुकड़े  के  लिए  लड़ाई  तक  कर  लेते  थे  तब  कहा  हम  अच्छे  बुरे  के  दिखावे  में  पड़ते  थे।

तब  वक़्त  और  हालात  जैसे  साथ  चलते  थे।
कुछ  थोड़ा  बहुत  बिगड़  भी  जाये  तो  सब  मिलकर  सम्भाल  लेते  थे।

याद  है  वो  बिना  बुलाई  शादियों  में  जाकर  खाना  खाना,  बिना  किसी  को  जाने  ही  बारातियो  में  घुसकर  डांस  करना।  वो  शादी  में  आयी  लड़कियों  को  देख  आपस  मे  समझौता  करना  जब  आखिर  में  किसी  के  हाथ  कुछ  ना  आये  तो  हर  जगह  ये  सब  अच्छा  नही  लगता  है  यार  बोलकर  वहां  से  निकल  लेना।

वो  साथ  बैठकर  पढ़ने  के  लिए  इकट्ठा  होना  और  वहा  पढाई  छोड़  बस  इधर  उधर  की  बाते  करना।  वो  मैग्गी  खाकर  पूरा  दिन  गुजारना,  वो  दोस्त  को  एक  मिनट  में  आया  बोलकर  घण्टो  इंतज़ार  कराना,  पिक्चर  में  लेट  आने  पर  भी  गालिया  सुनने  में  और  लेट  करना।

वो  बचपना  जो  बड़े  होते  ही  कहि  खो  सा  गया,  वो  बचकानी  हरकते  जो  हम  जानबूझ  कर  किया  करते  थे।  कभी  ऐसा  लगता  है  जैसे  उन  पलों  को  फिर  से  वापस  ला  सकता  तो  क्या  बात  होती,  कभी  ये  सोचता  हूं  कि   उन  यारो  के  साथ  थोड़ा  और  जी  सकता  तो  क्या  बात  होती।

गलती  ये  नही  की  हम  बड़े  हो  गए।
गलती  ये  है  की  हम  समझदार  हो  गए।
इस  दुनिया  की  भीड़  में  उस  मासूमियत  को  कहि  खो  दिया  है  हमने।
गलती  ये  है  कि  अब  हम  झूठी  हँसी  हसना  सिख  गए।
तभी  तो  दोस्तो  के  साथ  वाली  असल  जिंदगी  जीना  भूल  गए।

हम  सब  आज  भी  दोस्त  है,
पर  कोई  कहि  तो  कोई  कहि  और  व्यस्त  है। 
मिलते  है  अक्सर  फोन  कॉल  और  व्हाटसअप  चैट  पर,
लगता  है  जिंदगी  जिये  जैसे  बरसो  बीत  गए  है।

वक़्त  की  रफ्तार  को  कौन  रोक  पाया  है
मुझे  पता  है  वक़्त  के  साथ  कोई  नही  चल  पाया  है।
पर  एक  बात  जरूर  कहूंगा  यारो
वो  मिलते  रहने  के  वादे  निभाने  चाहिए।
जिंदगी  हसीन  है  इसे  जीने  में  तुमसब  का  भी  साथ  चाहिए।
एक  रोज़  फिर  उसी  चाय  की  तफरी  पर  मिलेंगे  ये  वादा  रहा,
बस  इस  वादे  को  पूरा  करने  का  सच्चा  इरादा  चाहिए।

फिर  मिलेंगे  उसी  बचपने  के  साथ  उन्ही,  उबड़  खाबड़  रास्तो  पर  साथ  चलने  को,  वही  पैसो  को  जोड़  जोड़  कर  फिर  पार्टी  मनाएंगे,  एक  बार  फिर  बिन  बुलाई  शादियों  में  जाकर  खाना  खाएंगे।
एक  बार  फिर  हम  कुछ  पलों  को  समेट  कर,  फिर  से  असल  जिंदगी  में  खुद  को  वापस  ले  जाएंगे।

ये  वादा  रहा  हम  अपनी  दोस्ती  में  कुछ  और  पन्ने  जोड़ने  साथ  जरूर  आएंगे,  और  इस  कहानी  को  एक  बार  फिर  दोहराएंगे।


Comments

  1. Jaane kaha gye wo din।।।।।
    BiteTu to wakt me le gya bhai ।

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    1. कुछ वक्त कभी गुजरे हुए नही लगते... बस हम उन्हें जीना छोड़ देते है।

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  2. I read it and enjoy it .It literally explain everything which we have gone through in Our life

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  3. 😢😢😗😗😗😗 👌👌
    What a lines touched the heart.

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    1. Thnak you for your review... It will touch your heart only when you have lived it.

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  4. Commendable job sandip. Liked the way you put it down.

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  5. मेरे वो कमीने दोस्त अब तो ये आलम हैं
    की उनसे मिलना भी कहा होता हो

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    1. मिलना तो दूर अब ज्यादा बाते भी नही होती।
      उन कमीने यारो के बिना अब खुशनुमा राते नही होती।

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  6. उपहारों का सिलसिला था सबने अपनी हैसियत से कुछ न कुछ दिया, पर साला दोस्त खाली हाथ बांधे कोने में मुस्कुरा रहा था। मैंने पूछा तू क्या लाया बोला पुरानी यादें लाया हूँ आ साथ मे जीते हैं।
    .
    .
    .
    सच मे सारे पल याद आ गए भी

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    Replies
    1. दोस्तो ने साथ बैठकर यादों का पिटारा खोला है...
      लगता है मरने से पहले ही कमीनो ने स्वर्ग का दरवाजा खोला है।

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  7. This comment has been removed by the author.

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