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Showing posts from August, 2020

वो आखिरी मुलाकात

मुझे  याद  है  आज  भी  वो  आखिरी  मुलाकात... वो  आखिरी  लम्हा  जिसकी  परछाई  वक़्त  के  साथ  धुंधली  तो  पड़  गयी  पर  वो  चेहरा  आज  भी  कभी  कभी  यादों  की  बारात  लेकर  मेरे  सामने ऐसे आ  जा ता   है ,   जैसे  ये  सबकुछ  अभी  कल  की  बात  हो । ... वो  जब  आयी  थी  उस  रोज  मुझसे  मिलने  तो  उसके  चेहरे  के  हाव-भाव  कुछ  अलग  ही  कहानी  बयां  कर  रहे  थे। उसके  माथे  पर  वो  बिंदी  भी  नही  थी  जो  वो  अक्सर  सिर्फ  मेरे  लिए  लगाया  करती  थी। वो  आंखों  के  काजल  काफी  हद  तक  धूल  चुके  थे,  जैसे  पूरी  रात  आंखों  से  बहते  आंसुओ  ने  उसके  गालो  पर  काली  लकीरे  बनाई  होंगी। वो  जुल्फों  को  समेटकर  बांधे  हुए  थी  जैसे,  उसने  अब  वो  बालो  को  छोड़  मुझे  ना  रिझाने  का  फैसला  कर  लिया  हो। वो  होठो  की  सुर्खियां  बता  रही  थी  कि  अब  उनपर  वो  खिलखिलाती  मुस्कान  नही  दिखेगी  जिन  के  आगे  मैं  हर  बार  हार  जाता  था। वो  आयी  और  उसने  कहा  कि  इस  दुनिया  की  भीड़  में  बहुत  मिलेंगे  जो  तुम्हे  मुझसे  ज्यादा  चाहेंगे,  जो  तुम्हारी  खुशियो  को  और  बढ़ाएंग

आज़ादी...

आज  हमारे  74वें  स्वतन्त्रता  दिवस  की  आप  सभी  को  मेरे  और  मेरे  परिवार  की  तरफ  से  हार्दिक  बधाईया!    भगवान  करे  कि  अपने  देश  की  अखंडता  और  आज़ादी  को  हमसब  साथ  मिलकर  आगे  ले  जाये वैसे  तो  आज  आज़ादी  का  जश्न  मनाने  का  दिन  है,  पर  साथ  ही  साथ  कुछ  सोचने  का  दिन  भी  है,  की  हमसे  चूक  कहा  हुई  है... मेरा  नमन  है  उन  वीर  जवानों  को जिन्होंने  आज़ादी  के  लिए  अपने  प्राण  त्याग  दिए  और  उनको  जो  इस  तिरंगे  की  शान  को  हमेसा  ऊपर  उठाएं  रखने  के  लिए   आज  भी  इसकी सुरक्षा  में  खड़े  है...  आज  भी  भारत  देश  को  आज़ाद  रखने  के  लिए  अपने  प्राणों  की  आहुति  देने  से  पीछे  नही  हटते।                       ये  हमारे  देश  की  बिडम्बना  ही  है  कि  हम  जिस  आज़ादी  की  लड़ाई   74साल  पहले  जीते  थे  उस  जीत  के  सिर्फ  2,   4  नामो  के  अलावा  किसी  को  नही  जानते  है  या  कहू  की  हमे  पूरा  सच  बताया  ही  नही  गया  की  हमे  किसका  किसका  सम्मान  करना  है।  मैं  भी  इस  टॉपिक  को  छेड़ना  चाहता  हु  क्योंकि  मुझे  पता  है  कि  किसी  को  नही 

मेरी अनकही कहानी (3)

मोहब्बक्त (chapter-3) वो  मोहब्बक्त  का  इंतज़ार  भी  बड़ा  कातिल  था। वो  आंखों  में  बसाकर  जीना  नाकाफी  था। वो  10  दिन  के  इंतज़ार  या  कहू  की  सारी  उम्मीदो  को  खोने  के  बाद ,   वो  एक  hiii... का  मैसेज  कुछ  ऐसा  था , जैसे  मेरे  खयालो  की  पतंग  जिसकी  डोर  मैंने  नाउम्मीद  होकर  जमीन  पर  ला  पटकी  थी ,   एक  बार  फिर  वो  आसमान  में  ऊंची  उड़ान  भरने  को  तैयार  था ।   जैसे  एक  बार  फिर  उसे  उड़ने  के  लिए  बादलो  ने  जगह  दे  दी  थी...  वो  होता  ही  कुछ  ऐसा  है ,   हम  लड़के  जब  पहली  बार  किसी  के  खयालो  में  पड़ते  है ,   तो  अपनी  ख्वाइशों  को  इतनी  तेजी  से  हवा  देते  है... जैसे  सिर्फ  उसके  देख  लेने  भर  से  ये  सारा  आसमान  हमारा  हो  गया  हो... जैसे  उसके  सिर्फ  बात  कर  लेने  से  हमने  ये  जहां   पा  लिया  हो.. लेकिन  उस  प्यार को  प्यार  कहने  में  बरसों  लग  जाते  है। तो  अब  आते  है  टॉपिक  पर...  उस  hiii...   के  रिप्लाई  में  लिखने  को  तो  मैं  पूरी  मोहब्बक्त  की  कहानी  लिख  देता ,   क्योंकि  बहुत  इंतज़ार  कर  चुका  था  मैं,  ले

दोस्ती...

किसी  ने  सही  कहा  है  कि  जो  खर्च  हो  जाता  है  वो  वापस  कभी  नही  मिलता  फिर  चाहे  वो  पैसा  हो  या  वक़्त।  वो  वक़्त  जिसकी  रफ्तार  भी  धीमी  पड़  जाती  थी  जब  वो  साथ  होते  थे  और  वही  वक़्त  रेत  की  तरह  मुट्ठी  से  निकल  जाता  था  जब  अकेलेपन  में  वो  साथ  देने  आते  थे।   कुछ  ऐसे  ही  किस्से  लिख  रहा  हू  उन  दोस्तो  के  नाम  जिन्होंने  जिंदगी  को  जिंदगी  बनाया   है- बहुत  दिनों  बाद  पुराने  दोस्तों  से  मुलाकात  हुई  मिलते  ही  दिल  मे  दबी  खुशनुमा  यादों  की  बरसात  हुई।  वो  झगड़े  जो  हम  एकदूसरे  से  करते  थे,  जो  कोई  और  कर  ले  तो  उसे  सब  साथ  ही  मारने  निकलते  थे।  वो  बाते  जो  एक  दूसरे  की  खिंचाई  से  शुरु  होती  थी।  वो  राते  जो  ताश  की  गड्डियों  की  शर्तों  में  गुजरती  थी।  कभी उदास  होने  पर  साली  गालिया  भी  पड़ती थी।  सेमेस्टर  के  दो  दिन  पहले  तो  किताबो  से  धूल  हटती  थी।                        वैसे  तो  कुछ  खास  समय  बचता  नही  था  हमारे  पास  पर  फिर  भी  सुबह  शाम  के  ना  जाने  कितने  घण्टे  चाय  की  तफरी  पर  कट