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PITA (पिता)

Ek shqsh jo hmari jindgi me sbse aham kirdar ada krte h
Ek shqsh jo hmari jindgi ko swaarne me khud ki gwa dete h
Ek shqsh jo na jaane kin haalato se gujrte h ki hm khus rhe 
Wo hote hai PITA

Wo Pita jo kbhi hm jaise hi jwaan ar apni khwaiso ko jeene ki iccha rkhta hoga
Wo Pita jo hmare jaise hi jindgi ko hmesa enjoy ar free rhne ki sochta hoga

Pr jb whi shaqs aaj Pita bna to jaise uski khwaise ab jimmedariya bn gyi 
Uske sapne  jaise dhundhle se ho gye
Uski aazadi un paiso ko kmaane me chli gyi jinse wo ab shyd apne Pita hone karz adaa krega

Wo saari icchaaye jo usne rkhi thi khud me ab wo usme dafan ho gyi ho jaise
Jaise ab
 khud k wajood ko maar kr unhe apne baccho me jinda rkhne ki ummid krni hai

Wo Pita hi hota jo khud to purane kpdo me hi kai tyohaar mna leta hai pr apne baccho ko hr baar nye dilata h
Wo Pita hi hota hai jo bina thake apne upr na jaane kitni jimmedariya lekr chlta h
Wo Pita hi hota hai jo hmari jindgi k hr mod pr jb tk rhta hai hme sikhata hai datata hai acche ar bure ka frq smjhata hai

Kisi se suna tha maine ki jeevan me ek acchaa insan hona bht jruri hota hai pr shyd usse phle ek acche Pita ka hona jyada jruri hai tbhi to wo hme ek acchaa beta ek acchaa bhai ek acchaa pati ek acche Pita ar sbse jruri ek bht acchaa Insaan bnne ki prerna deta hai



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