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Showing posts from October, 2019

Berojgaar

आज  है  देश  का  हमारे  हाल  कुछ  ऐसा ना  है  युवाओ  के  पास  नौकरी  ना  है  जेब  मे  पैसा    फिर  रहे  है  मारे  ग्रेजुएट  बेचारे ... फिर  भी  ना  कोई  बात  करे  ये  मुद्दा  है  कैसा। टी.वी  पर  बैठ  कर  यू  तो  रोज़  मुँह  फाड़ते  है... बेरोजगारी  पर  बात  करो  तो  ये  नेता  दूर  भागते  है। चुनाव  से  पहले तो  लाख  नौकरियां  गिनाते  है... जीत  जाने  के  बाद  कुर्सी,  जो  पुरानी  नौकरी  है  वो  भी  छीन  जाते  है। ना  जाने  कब  तक  इस  बेरोजगारी  में  मरना  है... कभी  तू  भी  कुछ  कमाएगा  ये  सवाल  अब  तो  हमारा  घर  भी  पूछता  है। घिस  गयी  चप्पलें  जिस  बाप  की  हमको  पढ़ाने  में, आज  भी  फ़टे  कपड़ो  में  हमारे  लिए  अपने  साहबो  से  सिफारिशें  करता  है। हर  त्योहार  के  आने  पर  हम  अंदर  से  थोड़े  उदास  हो  जाते  है जेब  मे  पैसे  ना  हो  तो  कहा  किसी  त्योहार  पर  नए  कपड़े  पहन  पाते  है। जिस  माँ  ने  अपना  पेट  काट  के हमे  आजतक  पाला  है... उस  माँ  तक  के  लिए  इस  बेरोजगारी  में  हम  कहा  कभी  कोई  खुशी  खरीद  पाते  है हर  बार  चुनते  हम  सरकार  उनकी  जो  नौकरी दिलान

PITA (पिता)

Ek shqsh jo hmari jindgi me sbse aham kirdar ada krte h Ek shqsh jo hmari jindgi ko swaarne me khud ki gwa dete h Ek shqsh jo na jaane kin haalato se gujrte h ki hm khus rhe  Wo hote hai PITA Wo Pita jo kbhi hm jaise hi jwaan ar apni khwaiso ko jeene ki iccha rkhta hoga Wo Pita jo hmare jaise hi jindgi ko hmesa enjoy ar free rhne ki sochta hoga Pr jb whi shaqs aaj Pita bna to jaise uski khwaise ab jimmedariya bn gyi  Uske sapne  jaise dhundhle se ho gye Uski aazadi un paiso ko kmaane me chli gyi jinse wo ab shyd apne Pita hone karz adaa krega Wo saari icchaaye jo usne rkhi thi khud me ab wo usme dafan ho gyi ho jaise Jaise ab  khud k wajood ko maar kr unhe apne baccho me jinda rkhne ki ummid krni hai Wo Pita hi hota jo khud to purane kpdo me hi kai tyohaar mna leta hai pr apne baccho ko hr baar nye dilata h Wo Pita hi hota hai jo bina thake apne upr na jaane kitni jimmedariya lekr chlta h Wo Pita hi hota hai jo hmari jindgi k hr mod pr jb tk rhta hai hme sikhata hai

मैं ही नारी ! मैं ही दुर्गा !

तुम  नही  समझोगे  की  मैं  कौन  हूं? मैं  जो  समाज  के  सारे  नियमो  को  निभाने  के  लिए  बाधित  हू। मैं  जिसे  हर  बार  समाज  की  कुरीतियों  का  शिकार  बनना  पड़ता  है। मैं  जो  कई  बार  बिना  गलतियों  के  भी  सज़ा  की  हकदार  बन  जाती  हूं। मैं  जिसे  पैदा  करने  से  पहले  ही  कई  बार  मार  देते  है, मैं  जो  हो  जाऊं  पैदा  तो  ये  मुझे  बोझ  समझते  है। मैं  जो  जीना  चाहू  अपनी  मर्ज़ी  से  ये  जिंदगी  तो  ये  मुझे  गालिया  बकते  है। मैं  जो  रहना  चाहू  आज़ाद  तो  ये  मेरे  पर  कुतरते  है। इन  सब  के  बाद  भी  मैं  अक्सर  मुस्कुराती  हू!  कभी  ना  शिकायत  करती,  कभी  ना  घबराती  हू क्योंकि  मैं  ही  तो  इस  समाज  का  सबसे  महत्वपूर्ण  किरदार  निभाती  हू           मैं  माँ  हू!  मैं  ही  बेटी  भी,        मैं  बहन  हू!  मैं  ही  पत्नी  भी,       मैं  सरस्वती  हू!  मैं  ही  दुर्गा  भी,       मैं  पार्वती  हू!  मैं  ही  काली  भी!                    मैं  नारी  हू!                 मैं  हूं  सम्मान  भी! पर  तुम  नही  समझोगे  की  मैं  कौन  हूं?

College ke Kamine Dost

Jaane kha kho gyi h wo shaame jo aksr yaaro k bich gujrti thi Jaane kha kho gyi h wo subh jo aksr ekdurse ki khichai krte hue suru hoti thi Mujhe yaad h jb college me hm sb saath the to kaise jindgi bdi aasan si lgti thi Hr semester k baad kaise goa jaane ki planning bnti thi Ar fir kisi ek kmine ki wjh se wo puri trip cancel hoti thi Wo hostel waali ragging jisse jindgi jeene ki sabak milti thi Wo meshh ka khana jha roz thaliya uthane se jyada ptki jaati thi Class me baith lecture me distube kr k dusro pr ungliya uthti thi Mujhe yaad kaise clg ki ldkiya bi hmari frndship se jlti thi Kisi ldki ko jo koi ek dekh bi le to bss wo bakiyo ki bhabhi bnti thi Pr kuch bi ho un kamino k bina jaise us wqt jindgi beeran si lgti thi Wo khana naa bnane k bahano me begani shaadiyo ki tndoori rotiya ktati thi Tb kha dikhawe k liye jindgi ki mastiya rukti thi Semester suru hone k ek raat phle kitaabo se dhul hthti thi Fir bi hr semester clear kr lene ki himmat un kamine dos